आज वामपंथी विचारधारा से बने इतिहास के अनुसार महिशासुर साम्प्रदायिक है, जबकि डायनासोर काल्पनिक होते हुए भी धर्म निरपेक्ष होता है. हमारी ज्ञान परम्परा को पहले फारसी में बाद में अंग्रेजी में रूपांतरित किया गया. यह हमारा दुर्भाग्य है कि हम उस अंग्रेजी के ज्ञान को हिन्दी में रूपांतरित करके पढ़ रहे हैं. पश्चिम के अनुसार मूल्य प्रणाली आज आधुनिक है. लेकिन भारतीय ज्ञान के अनुसार चित्त की अवधारणा बतायी गई है. ऋग्वेद में ऐसा वर्णन है कि चित्त की अभिव्यक्ति सत्य होती है. सत्य जब क्रियाशील होता है तो वह धर्म बन जाता है. अंग्रेजी भाषा के कारण हमने मूल को छोड़ दिया.