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शिवलिंग

शिवलिंग को भगवन शिव के गुप्तांग के रूप में प्रचारित किया जाता है। जोकि पूरी तरह गलत है। इस विषय में गलत प्रचार की वजह से हिन्दू भी शिवलिंग को शिव भगवान का गुप्तांग समझने लगे हैं और दूसरे हिन्दुओ को भी ये गलत जानकारी देने लगे हैं। इस आधार पर शिवलिंग की पूजा की […]

सामवेद का अर्थ

‘साम‘ शब्द का अर्थ है ‘गान‘।सामवेद में संकलित मंत्रों को देवताओं की स्तुति के समय गाया जाता था।सामवेद में कुल 1875 ऋचायें हैं।जिनमें 75 के अतिरिक्त शेष ऋग्वेद से ली गयी हैं।इन ऋचाओं का गान सोमयज्ञ के समय ‘उदगाता‘ करते थे।सामवेद की तीन महत्त्वपूर्ण शाखायें हैं :-कौथुमीय,जैमिनीय एवंराणायनीय।देवता विषयक विवेचन की दृष्ठि से सामवेद का […]

आरण्यक परिचय

स्थूल के विरुद्ध सूक्ष्म के प्रति आकर्षण स्वभावतः उत्पन्न हो जाता है। श्रौतयज्ञों के सन्दर्भ में भी, जनमानस में, विशेष रूप से प्रबृद्ध वर्ग में, इसी प्रकार का आकर्षण शनैःशनैः उत्तरोत्तर अभिवृद्ध हुआ। यज्ञ के द्रव्यात्मक स्वरूप के बहुविध स्वरूप–विस्तार में, जब उसका वास्तविक मर्म ओझल होने लगा, तो यह आवश्यकता गहराई से अनुभव की […]

सहजयान और वज्रयान

बौद्ध संप्रदाय में सहजयान और वज्रयान में भी स्त्री साहचर्य की अनिवार्यता स्वीकार की गई है और बौद्ध साधक अपने को ‘कपाली’ कहते थे । प्राचीन साहित्य में कपालकुंडला और अघोरघंट का उल्लेख आया है। इस ग्रंथ से कापालिक मत के संबंध में कुछ स्थूल तथ्य स्थिर किए जा सकते हैं। कापालिक मत नाथ संप्रदायियों […]

ब्रह्म मुहूर्त का वैदिक विज्ञान

रात्रि के अंतिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिए सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घण्टे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त […]

आरुणि : प्रथम अध्यात्म मनोवैज्ञानिक

आरुणि के अध्यात्म विचारों का विस्तृत विवेचन छांदोग्य तथा बृहदारण्यक उपनिषदों में बड़े रोचक ढंग से किया गया है। तत्ववेत्ताओं के इतिहास में आरुणि का पद याज्ञवल्क्य के ही समकक्ष माना जाता है जो इनके शिष्य होने के अतिरिक्त उपनिषत्कालीन दार्शनिकों में नि:संशय सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। मनोवैज्ञानिक तथ्यों के विषय में आरुणि की मान्यता […]

उपनिषद्

उपनिषद् सनातन धर्म के महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ हैं। ये वैदिक वांग्मय के अभिन्न भाग हैं। इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है।उपनिषदों में कर्मकांड को ‘अवर’ कहकर ज्ञान को इसलिए महत्व दिया गया कि ज्ञान स्थूल से सूक्ष्म की ओर ले जाता है। […]

महर्षि पतंजलि

महर्षि पतंजलि अद्भुत है। अध्यात्म जगत् के शिखर पुरुष हैं, परन्तु वैज्ञानिक हैं। प्रबुद्ध हैं—बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक की भाँति, लेकिन इन सबसे पूरी तरह से अलग एवं मौलिक हैं। बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक- ये सभी महान् धर्म प्रवर्तक हैं, इन्होंने मानव मन और इसकी संरचना को बिल्कुल बदल दिया है, लेकिन उनकी […]

तंत्र शास्त्र की इंजीनियरिंग

आप जरूर जानना चाहेंगे कि आखिर यहां पर हम “तंत्र शास्त्र की इंजीनियरिंग” यानि अभियांत्रिकी शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं……….वस्तुतः इसके पीछे छिपी है तंत्र शास्त्र का विज्ञान सम्मत होने के साथ इसकी प्रायोगिकता की सार्थकता, जिसके आधार पर ही इसका हर प्रयोग सफल सिद्ध होता है। इसके लिए जिस भी प्रकार की […]

मंदिर ऊर्जा

कभी आपने सोचा है कि जब आप किसी मंदिर में जाते हैं तो कुछ लोग देव मूर्ति को अपना सर झुका के प्रणाम करते हैं तो कुछ लोग साष्टांग दंडवत यानी प्रणाम करते हैं आइये जानते हैं की इसका वैदिक विज्ञान और मनोविज्ञान क्या है..?जब आप मंदिर में जाये तो सबसे पहले मौन हो जाएं […]