Category: धर्म

उपनिषद्

उपनिषद् सनातन धर्म के महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ हैं। ये वैदिक वांग्मय के अभिन्न भाग हैं। इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है।उपनिषदों में कर्मकांड को ‘अवर’ कहकर ज्ञान को इसलिए महत्व दिया गया कि ज्ञान स्थूल से सूक्ष्म की ओर ले जाता है। […]

महर्षि पतंजलि

महर्षि पतंजलि अद्भुत है। अध्यात्म जगत् के शिखर पुरुष हैं, परन्तु वैज्ञानिक हैं। प्रबुद्ध हैं—बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक की भाँति, लेकिन इन सबसे पूरी तरह से अलग एवं मौलिक हैं। बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक- ये सभी महान् धर्म प्रवर्तक हैं, इन्होंने मानव मन और इसकी संरचना को बिल्कुल बदल दिया है, लेकिन उनकी […]

ऋग्वेद विज्ञान

ऋग्वेद को बार-बार पढ़ने पर मुझे लगा कि इसको समझने में दो सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। प्रथम, ऋग्वेद के ऋषियों ने यह ज्ञान का भण्डार एक-दो वर्षों में न देकर सैकड़ों वर्षों में दिया है। हम आज तक ऋग्वेद के 402 ऋषियों को उनके काल के अनुसार व्यवस्थित नहीं कर पाए हैं जिससे एक विषय […]

ऋग्वेद विज्ञान

भारतीय विद्वानों जैसे सायण, वेंकटमाधव का भाष्य जो डॉ. लक्ष्मण स्वरूप द्वारा सम्पादित है, स्वामी दयानन्द, सातवलेकर आदि ने ऋग्वेद पर लिखा है पर उनमें आपस में ही मतभेद है, वे विज्ञान की सहायता नहीं लेते हैं, वे किसी आधुनिक शोध विधि को भी नहीं अपनाते हैं। तथा संस्कृत शब्दों के विभिन्न अर्थों के आधार […]

ऋषियों की आत्मा

ऋषियों ने शनैः शनैः आत्मा का भी पता लगा लिया था तथा यह भी मालूम कर लिया था कि आत्मा अजर और अमर है तथा यह बार-बार किसी न किसी शरीर में प्रविष्ट होकर उसे जीवित कर देती है। ये ऋषि परमात्मा, विष्णु शिव या रुद्र आदि के बारे में भी अधिक-अधिक जानने का प्रयास […]

वेद के ऋषि

वेद के रचनेवाले ऋषियों को भूत तथा भविष्य का ज्ञान प्रत्यक्ष के समान होता है।उसमें इंद्रिय और अर्थ के सन्निकर्ष की आवश्यकता नहीं रहती।यह “प्रातिभ” (प्रतिभा से उत्पन्न) ज्ञान या “आर्षज्ञान” कहलाता है।यह ज्ञान विशुद्ध अत:करण वाले जीव में भी कभी कभी हो जाता है।जैसे – एक पवित्र कन्या कहती है – कल मेरे भाई […]

गंध

गीताकार भगवान श्रीकृष्ण ने कहा :‘पुण्योगंधः पृथिव्यां च…।‘पृथ्वी में पुण्यशाली गंध मैं हूँ ।सुगंध नहीं कहा ।सुगंध तो परफ्यूम में हो सकती है ।पृथ्वी में पुण्यशाली गंध है ।जिस गंध से मन प्रसन्न हो और सात्त्विकता की तरफ जाय वह पुण्यशाली गंध है और भगवान कहते है कि ‘वह मैं हूँ ।परफ्यूम की सुगंध पुण्यशाली […]

धर्म एवं विज्ञान

आज धर्म एवं विज्ञान को अलग-अलग मानना एक साधारण मान्यता है,जबकि धर्म एवं विज्ञान को एक साबित करना टेढ़ी खीर हो गयी है।आप को शरीर और दिमाग के बारे में पूछा जाए तो आप क्या कहेगे ?एक या अलग-अलग हैं।वैज्ञानिक दृष्टि से शरीर तो पदार्थ का बना है जबकि दिमाग चुम्बकीय और विद्युत्-चुम्बकीय बल रेखाओं […]

ईश्वर मतलब क्या …..?

कुछ लोगों का मानना है कि ईश्वर शब्द अवैदिक है और इसे प्रयोग करना अधर्म है क्योंकि उनलोगों का मानना है इसाई धर्म के ईशा से ईश्वर शब्द का निर्माण हुआ है । लेकिन , उपरोक्त सारे तथ्य गलत है । तो फिर ईश्वर है क्या और इसका मतलब क्या होता है , आइये जानते […]