आज धर्म एवं विज्ञान को अलग-अलग मानना एक साधारण मान्यता है,जबकि धर्म एवं विज्ञान को एक साबित करना टेढ़ी खीर हो गयी है।
आप को शरीर और दिमाग के बारे में पूछा जाए तो आप क्या कहेगे ?
एक या अलग-अलग हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से शरीर तो पदार्थ का बना है जबकि दिमाग चुम्बकीय और विद्युत्-चुम्बकीय बल रेखाओं वाला क्षेत्र है,
अतः अलग-अलग विषय होते हुए भी जिस तरह दोनों एक ही देह में विद्यमान है और एक दुसरे के पूरक हैं,
उसी तरह धर्म और विज्ञान भी परस्पर पूरक हैं।
आज बस इतना ही