सत्य, शिव और सौन्दर्य के बीच सम्यक सन्तुलन का नाम ही शास्त्रीय कला है | शास्त्र के खूँटे को तोड़कर विश्वामित्री सृष्टि रचने की उमंग को रोमांटिसिज्म कहते हैं | दोनों प्रवृत्तियों में वाद और प्रतिवाद की तरह संघर्ष चलता रहता है जिसका परिणाम है इतिहास |
सत्य, शिव और सौन्दर्य के बीच सम्यक सन्तुलन का नाम ही शास्त्रीय कला है | शास्त्र के खूँटे को तोड़कर विश्वामित्री सृष्टि रचने की उमंग को रोमांटिसिज्म कहते हैं | दोनों प्रवृत्तियों में वाद और प्रतिवाद की तरह संघर्ष चलता रहता है जिसका परिणाम है इतिहास |