‘‘मन के विज्ञान’’ को मनोविज्ञान कहा जाता हैं।
भारतीय वाड्मय में उसकी प्रकृति पष्चिम के मनोविज्ञान के समान शैक्षणिक (Educational) नहीं होकर आध्यामित्क (Spiritual) हैं।
अतः उसे ‘‘मन का ज्ञान’’ कहना अधिक सार्थक प्रतीत होता है।
प्राचीन भारत में मनोविज्ञान को आत्मा के विज्ञान और चेतना के विज्ञान के रूप में लिया जाता है। भारतीय मनीषी आध्यात्मिक साधना, जिसमें ध्यान, समाधि और योग भी सम्मिलित था, के द्वारा जो अनुभव एवं अनुभूतियां प्राप्त करते थे उनके आधार पर मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान भी तलाषा जाता था।
यूं तो पाश्चात्य मनोविज्ञान का उद्भव भी दर्षन से हुआ हैं। मनोवैज्ञानिक मन के अनुसार ‘‘मनोविज्ञान, व्यवहार और अनुभूति का एक निश्चित विज्ञान है जिसमें व्यवहार को अनुभूति के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है’’।
आज बस इतना ही……