भारत के सभी ग्रन्थों के केन्द्र में तीन तत्व अवश्य मिलेंगे –
जीवन मूल्य,
नैतिकता एवं
संस्कृति,
असतोमासद्गमय
तमसोमाज्योतिर्गमय
मृत्योर्माअमृतम्गमय।
भारत एक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक देश है। जीवन मूल्य के केन्द्र में अध्यात्म है, अध्यात्म न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की भी सोचता है।
संस्कृति भारतीय इतिहास की जड़ मूल है। इतिहास हमारा कृतित्व है, जबकि संस्कृति संस्कार से जुड़ी है।
सद्भावना, सहयोग, सहअस्तित्व संस्कृति के मूल तत्व हैं। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की अभिव्यक्ति ही इतिहास है।
“धर्म सुखं अर्थः “
भारत में धर्म मनुष्य के मर्म में है। भारत में त्यागमूलक योग की बात कही गयी है। दुनिया के किसी भी देश में मोक्ष का विचार नहीं है।
जहां पाश्चात्य दर्शन समाप्त होता है, वहीं से भारतीय दर्शन शुरू होता है।
आज बस इतना ही….