स्थूल के विरुद्ध सूक्ष्म के प्रति आकर्षण स्वभावतः उत्पन्न हो जाता है। श्रौतयज्ञों के सन्दर्भ में भी, जनमानस में, विशेष रूप से प्रबृद्ध वर्ग में, इसी प्रकार का आकर्षण शनैःशनैः उत्तरोत्तर अभिवृद्ध हुआ। यज्ञ के द्रव्यात्मक स्वरूप के बहुविध स्वरूप–विस्तार में, जब उसका वास्तविक मर्म ओझल होने लगा, तो यह आवश्यकता गहराई से अनुभव की […]
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आरण्यक परिचय
ब्रह्म मुहूर्त का वैदिक विज्ञान
रात्रि के अंतिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिए सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घण्टे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त […]
उपनिषद्
उपनिषद् सनातन धर्म के महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ हैं। ये वैदिक वांग्मय के अभिन्न भाग हैं। इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है।उपनिषदों में कर्मकांड को ‘अवर’ कहकर ज्ञान को इसलिए महत्व दिया गया कि ज्ञान स्थूल से सूक्ष्म की ओर ले जाता है। […]
महर्षि पतंजलि
महर्षि पतंजलि अद्भुत है। अध्यात्म जगत् के शिखर पुरुष हैं, परन्तु वैज्ञानिक हैं। प्रबुद्ध हैं—बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक की भाँति, लेकिन इन सबसे पूरी तरह से अलग एवं मौलिक हैं। बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक- ये सभी महान् धर्म प्रवर्तक हैं, इन्होंने मानव मन और इसकी संरचना को बिल्कुल बदल दिया है, लेकिन उनकी […]
मंत्र साधना विद्या
अन्तर्यात्रा विज्ञान साधकों के लिए पुकार है। पुकार के ये स्वर बड़े आश्चर्यों से भरे हैं। इन्हें सब नहीं सुन सकते। इन्हें सुन पाने के लिए साधक का अन्तःकरण चाहिए।जिनमें साधक की अन्तर्चेतना, साधक की अन्तर्भावना है- वही इन्हें सुन पाएँगे। उन्हीं को अपने अस्तित्व के मर्म में महर्षि पतंजलि की छुअन महसूस होगी। वही […]
वेद अर्थ
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।ऋग-स्थिति,यजु-रूपांतरण,साम-गतिशील औरअथर्व-जड़।ऋक को धर्म,यजुः को मोक्ष,साम को काम,अथर्व को अर्थभी कहा जाता है।इन्ही के आधार पर धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र और मोक्षशास्त्र की रचना हुई।आज बस इतना ही……
गंध
गीताकार भगवान श्रीकृष्ण ने कहा :‘पुण्योगंधः पृथिव्यां च…।‘पृथ्वी में पुण्यशाली गंध मैं हूँ ।सुगंध नहीं कहा ।सुगंध तो परफ्यूम में हो सकती है ।पृथ्वी में पुण्यशाली गंध है ।जिस गंध से मन प्रसन्न हो और सात्त्विकता की तरफ जाय वह पुण्यशाली गंध है और भगवान कहते है कि ‘वह मैं हूँ ।परफ्यूम की सुगंध पुण्यशाली […]
गायत्री मंत्र
जब भी कोई व्यक्ति गायत्री मंत्र का पाठ करता है तो अनेक प्रकार की संवेदनाएं इस मंत्र से होती हुई व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं।जर्मन वैज्ञानिक कहते हैं कि जब भी कोई व्यक्ति अपने मुंह से कुछ बोलता है तो उसके बोलने में आवाज का जो स्पंदन और कंपन होता है, वह 175 […]
दर्शन और विज्ञान
आज जब व्यक्तिगत स्तर, आर्थिक स्तर और सामाजिक यानी संस्थागत तीनो स्तर पर विषमता फैल रही है तो इस विषमता को सम में आप्त (समाप्त) करने का एक मात्र उपाय यानी प्रथम और अन्तिम उपाय है (दर्शन और विज्ञान) (सेन्स और साईन्स) (धर्म और विज्ञान) (ज्ञान और विज्ञान) (सांख्य और योग) (सिद्धान्त और कर्म) (थ्योरी […]
संसार
हम जिस सृष्टि या संसार में रहते हैं उसको बने व चलते हुए 1 अरब 96 करोड़ से अधिक वर्ष हो गये हैं।इस अवधि में मनुष्यों की लगभग 78 हजार पीढि़यां बीत गई हैं अर्थात् हमारे माता-पिता, उनके माता-पिता, फिर उनके और फिर उनके माता-पिता, इस प्रकार पीछे चलते जाये तो लगभग 78 हजार पूर्वज […]