Category: ऋषि

आरण्यक परिचय

स्थूल के विरुद्ध सूक्ष्म के प्रति आकर्षण स्वभावतः उत्पन्न हो जाता है। श्रौतयज्ञों के सन्दर्भ में भी, जनमानस में, विशेष रूप से प्रबृद्ध वर्ग में, इसी प्रकार का आकर्षण शनैःशनैः उत्तरोत्तर अभिवृद्ध हुआ। यज्ञ के द्रव्यात्मक स्वरूप के बहुविध स्वरूप–विस्तार में, जब उसका वास्तविक मर्म ओझल होने लगा, तो यह आवश्यकता गहराई से अनुभव की […]

तंत्र शास्त्र की इंजीनियरिंग

आप जरूर जानना चाहेंगे कि आखिर यहां पर हम “तंत्र शास्त्र की इंजीनियरिंग” यानि अभियांत्रिकी शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं……….वस्तुतः इसके पीछे छिपी है तंत्र शास्त्र का विज्ञान सम्मत होने के साथ इसकी प्रायोगिकता की सार्थकता, जिसके आधार पर ही इसका हर प्रयोग सफल सिद्ध होता है। इसके लिए जिस भी प्रकार की […]

मंदिर ऊर्जा

कभी आपने सोचा है कि जब आप किसी मंदिर में जाते हैं तो कुछ लोग देव मूर्ति को अपना सर झुका के प्रणाम करते हैं तो कुछ लोग साष्टांग दंडवत यानी प्रणाम करते हैं आइये जानते हैं की इसका वैदिक विज्ञान और मनोविज्ञान क्या है..?जब आप मंदिर में जाये तो सबसे पहले मौन हो जाएं […]

शिव

शिव के पांच रूपों में से एक रूप है अघोर रूप, जो हमेशा से लोगों की जिज्ञासा का विषय रहा है। आज हम आपको बताएगें अघोरियों के जीवन का वो सच जो जितना कठोर है, उतना ही रहस्यमयी भी।अघोर पंथ हिंदू धर्म का वो संप्रदाय है, जिसका पालन करने वालों को अघोरी कहते हैं। अघोर […]

मंत्र साधना विद्या

अन्तर्यात्रा विज्ञान साधकों के लिए पुकार है। पुकार के ये स्वर बड़े आश्चर्यों से भरे हैं। इन्हें सब नहीं सुन सकते। इन्हें सुन पाने के लिए साधक का अन्तःकरण चाहिए।जिनमें साधक की अन्तर्चेतना, साधक की अन्तर्भावना है- वही इन्हें सुन पाएँगे। उन्हीं को अपने अस्तित्व के मर्म में महर्षि पतंजलि की छुअन महसूस होगी। वही […]

ऋग्वेद विज्ञान

ऋग्वेद को बार-बार पढ़ने पर मुझे लगा कि इसको समझने में दो सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। प्रथम, ऋग्वेद के ऋषियों ने यह ज्ञान का भण्डार एक-दो वर्षों में न देकर सैकड़ों वर्षों में दिया है। हम आज तक ऋग्वेद के 402 ऋषियों को उनके काल के अनुसार व्यवस्थित नहीं कर पाए हैं जिससे एक विषय […]

ऋग्वेद विज्ञान

भारतीय विद्वानों जैसे सायण, वेंकटमाधव का भाष्य जो डॉ. लक्ष्मण स्वरूप द्वारा सम्पादित है, स्वामी दयानन्द, सातवलेकर आदि ने ऋग्वेद पर लिखा है पर उनमें आपस में ही मतभेद है, वे विज्ञान की सहायता नहीं लेते हैं, वे किसी आधुनिक शोध विधि को भी नहीं अपनाते हैं। तथा संस्कृत शब्दों के विभिन्न अर्थों के आधार […]

ऋषियों की आत्मा

ऋषियों ने शनैः शनैः आत्मा का भी पता लगा लिया था तथा यह भी मालूम कर लिया था कि आत्मा अजर और अमर है तथा यह बार-बार किसी न किसी शरीर में प्रविष्ट होकर उसे जीवित कर देती है। ये ऋषि परमात्मा, विष्णु शिव या रुद्र आदि के बारे में भी अधिक-अधिक जानने का प्रयास […]

वेद अर्थ

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।ऋग-स्थिति,यजु-रूपांतरण,साम-गतिशील औरअथर्व-जड़।ऋक को धर्म,यजुः को मोक्ष,साम को काम,अथर्व को अर्थभी कहा जाता है।इन्ही के आधार पर धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र और मोक्षशास्त्र की रचना हुई।आज बस इतना ही……

वेद के ऋषि

वेद के रचनेवाले ऋषियों को भूत तथा भविष्य का ज्ञान प्रत्यक्ष के समान होता है।उसमें इंद्रिय और अर्थ के सन्निकर्ष की आवश्यकता नहीं रहती।यह “प्रातिभ” (प्रतिभा से उत्पन्न) ज्ञान या “आर्षज्ञान” कहलाता है।यह ज्ञान विशुद्ध अत:करण वाले जीव में भी कभी कभी हो जाता है।जैसे – एक पवित्र कन्या कहती है – कल मेरे भाई […]