भारतीय विद्वानों जैसे सायण, वेंकटमाधव का भाष्य जो डॉ. लक्ष्मण स्वरूप द्वारा सम्पादित है, स्वामी दयानन्द, सातवलेकर आदि ने ऋग्वेद पर लिखा है पर उनमें आपस में ही मतभेद है, वे विज्ञान की सहायता नहीं लेते हैं, वे किसी आधुनिक शोध विधि को भी नहीं अपनाते हैं। तथा संस्कृत शब्दों के विभिन्न अर्थों के आधार […]
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ऋग्वेद विज्ञान
ऋषियों की आत्मा
ऋषियों ने शनैः शनैः आत्मा का भी पता लगा लिया था तथा यह भी मालूम कर लिया था कि आत्मा अजर और अमर है तथा यह बार-बार किसी न किसी शरीर में प्रविष्ट होकर उसे जीवित कर देती है। ये ऋषि परमात्मा, विष्णु शिव या रुद्र आदि के बारे में भी अधिक-अधिक जानने का प्रयास […]
वेद अर्थ
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।ऋग-स्थिति,यजु-रूपांतरण,साम-गतिशील औरअथर्व-जड़।ऋक को धर्म,यजुः को मोक्ष,साम को काम,अथर्व को अर्थभी कहा जाता है।इन्ही के आधार पर धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, कामशास्त्र और मोक्षशास्त्र की रचना हुई।आज बस इतना ही……
वेद के ऋषि
वेद के रचनेवाले ऋषियों को भूत तथा भविष्य का ज्ञान प्रत्यक्ष के समान होता है।उसमें इंद्रिय और अर्थ के सन्निकर्ष की आवश्यकता नहीं रहती।यह “प्रातिभ” (प्रतिभा से उत्पन्न) ज्ञान या “आर्षज्ञान” कहलाता है।यह ज्ञान विशुद्ध अत:करण वाले जीव में भी कभी कभी हो जाता है।जैसे – एक पवित्र कन्या कहती है – कल मेरे भाई […]
विश्राम
दिन भर कार्य करने से शरीर के सभी अंग थक जाते हैं।उनको विश्राम की अपेक्षा होती है।इंद्रियॉ विशेषकर थक जाती हैं और मन में लीन हो जाती है।फिर मन मनोवह नाड़ी के द्वारा पुरीतत् नाड़ी में विश्राम के लिए चला जाता है।वहाँ पहुँचने के पहले, पूर्वकर्मों के संस्कारों के कारण तथा वात, पित्त और कफ […]
भोग
संसार में जितनी वस्तुएँ उत्पन्न होती हैं सभी उत्पन्न हुए जीवों के भोग के लिए ही हैं। अपने पूर्वजन्म के कर्मों के प्रभाव से जीव संसार में उत्पन्न होता है। उसी प्रकार भोग के अनुकूल उसके शरीर, योनि, कुल, देश, आदि सभी होते हैं। जब वह विशेष भोग समाप्त हो जाता है, तब उसकी मृत्यु […]
गंध
गीताकार भगवान श्रीकृष्ण ने कहा :‘पुण्योगंधः पृथिव्यां च…।‘पृथ्वी में पुण्यशाली गंध मैं हूँ ।सुगंध नहीं कहा ।सुगंध तो परफ्यूम में हो सकती है ।पृथ्वी में पुण्यशाली गंध है ।जिस गंध से मन प्रसन्न हो और सात्त्विकता की तरफ जाय वह पुण्यशाली गंध है और भगवान कहते है कि ‘वह मैं हूँ ।परफ्यूम की सुगंध पुण्यशाली […]
गायत्री मंत्र
जब भी कोई व्यक्ति गायत्री मंत्र का पाठ करता है तो अनेक प्रकार की संवेदनाएं इस मंत्र से होती हुई व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं।जर्मन वैज्ञानिक कहते हैं कि जब भी कोई व्यक्ति अपने मुंह से कुछ बोलता है तो उसके बोलने में आवाज का जो स्पंदन और कंपन होता है, वह 175 […]
दर्शन और विज्ञान
आज जब व्यक्तिगत स्तर, आर्थिक स्तर और सामाजिक यानी संस्थागत तीनो स्तर पर विषमता फैल रही है तो इस विषमता को सम में आप्त (समाप्त) करने का एक मात्र उपाय यानी प्रथम और अन्तिम उपाय है (दर्शन और विज्ञान) (सेन्स और साईन्स) (धर्म और विज्ञान) (ज्ञान और विज्ञान) (सांख्य और योग) (सिद्धान्त और कर्म) (थ्योरी […]