Tag: आयुर्वेद

ब्रह्म मुहूर्त का वैदिक विज्ञान

रात्रि के अंतिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिए सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घण्टे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त […]

महर्षि पतंजलि

महर्षि पतंजलि अद्भुत है। अध्यात्म जगत् के शिखर पुरुष हैं, परन्तु वैज्ञानिक हैं। प्रबुद्ध हैं—बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक की भाँति, लेकिन इन सबसे पूरी तरह से अलग एवं मौलिक हैं। बुद्ध, कृष्ण, महावीर एवं नानक- ये सभी महान् धर्म प्रवर्तक हैं, इन्होंने मानव मन और इसकी संरचना को बिल्कुल बदल दिया है, लेकिन उनकी […]

मंदिर ऊर्जा

कभी आपने सोचा है कि जब आप किसी मंदिर में जाते हैं तो कुछ लोग देव मूर्ति को अपना सर झुका के प्रणाम करते हैं तो कुछ लोग साष्टांग दंडवत यानी प्रणाम करते हैं आइये जानते हैं की इसका वैदिक विज्ञान और मनोविज्ञान क्या है..?जब आप मंदिर में जाये तो सबसे पहले मौन हो जाएं […]

ऋषियों की आत्मा

ऋषियों ने शनैः शनैः आत्मा का भी पता लगा लिया था तथा यह भी मालूम कर लिया था कि आत्मा अजर और अमर है तथा यह बार-बार किसी न किसी शरीर में प्रविष्ट होकर उसे जीवित कर देती है। ये ऋषि परमात्मा, विष्णु शिव या रुद्र आदि के बारे में भी अधिक-अधिक जानने का प्रयास […]

गंध

गीताकार भगवान श्रीकृष्ण ने कहा :‘पुण्योगंधः पृथिव्यां च…।‘पृथ्वी में पुण्यशाली गंध मैं हूँ ।सुगंध नहीं कहा ।सुगंध तो परफ्यूम में हो सकती है ।पृथ्वी में पुण्यशाली गंध है ।जिस गंध से मन प्रसन्न हो और सात्त्विकता की तरफ जाय वह पुण्यशाली गंध है और भगवान कहते है कि ‘वह मैं हूँ ।परफ्यूम की सुगंध पुण्यशाली […]

वेद-पुराण क्या है ?

वेद-पुराण क्या है और एकेश्वरवाद और बहुदेववाद पर आधारित हिन्दुओं के संप्रदाय कितने हैं। वेदों के सूत्रों के आधार पर ही आयुर्वेद, धनुर्वेद, स्थापत्यवेद और गान्धर्ववेद का निर्माण हुआ। आयुर् वेद के कर्ता धन्वन्तरि, धनुर्वेद के कर्ता विश्वामित्र, गान्धर्ववेद के कर्ता नारद मुनि और स्थापत्यवेद के कर्ता विश्वकर्मा हैं। वेदों को पढ़कर ही अक्षपाद गौतम […]