‘साम‘ शब्द का अर्थ है ‘गान‘।सामवेद में संकलित मंत्रों को देवताओं की स्तुति के समय गाया जाता था।सामवेद में कुल 1875 ऋचायें हैं।जिनमें 75 के अतिरिक्त शेष ऋग्वेद से ली गयी हैं।इन ऋचाओं का गान सोमयज्ञ के समय ‘उदगाता‘ करते थे।सामवेद की तीन महत्त्वपूर्ण शाखायें हैं :-कौथुमीय,जैमिनीय एवंराणायनीय।देवता विषयक विवेचन की दृष्ठि से सामवेद का […]
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सामवेद का अर्थ
सहजयान और वज्रयान
बौद्ध संप्रदाय में सहजयान और वज्रयान में भी स्त्री साहचर्य की अनिवार्यता स्वीकार की गई है और बौद्ध साधक अपने को ‘कपाली’ कहते थे । प्राचीन साहित्य में कपालकुंडला और अघोरघंट का उल्लेख आया है। इस ग्रंथ से कापालिक मत के संबंध में कुछ स्थूल तथ्य स्थिर किए जा सकते हैं। कापालिक मत नाथ संप्रदायियों […]
आरुणि : प्रथम अध्यात्म मनोवैज्ञानिक
आरुणि के अध्यात्म विचारों का विस्तृत विवेचन छांदोग्य तथा बृहदारण्यक उपनिषदों में बड़े रोचक ढंग से किया गया है। तत्ववेत्ताओं के इतिहास में आरुणि का पद याज्ञवल्क्य के ही समकक्ष माना जाता है जो इनके शिष्य होने के अतिरिक्त उपनिषत्कालीन दार्शनिकों में नि:संशय सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। मनोवैज्ञानिक तथ्यों के विषय में आरुणि की मान्यता […]
उपनिषद्
उपनिषद् सनातन धर्म के महत्त्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ हैं। ये वैदिक वांग्मय के अभिन्न भाग हैं। इनमें परमेश्वर, परमात्मा-ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का बहुत ही दार्शनिक और ज्ञानपूर्वक वर्णन दिया गया है।उपनिषदों में कर्मकांड को ‘अवर’ कहकर ज्ञान को इसलिए महत्व दिया गया कि ज्ञान स्थूल से सूक्ष्म की ओर ले जाता है। […]
विश्राम
दिन भर कार्य करने से शरीर के सभी अंग थक जाते हैं।उनको विश्राम की अपेक्षा होती है।इंद्रियॉ विशेषकर थक जाती हैं और मन में लीन हो जाती है।फिर मन मनोवह नाड़ी के द्वारा पुरीतत् नाड़ी में विश्राम के लिए चला जाता है।वहाँ पहुँचने के पहले, पूर्वकर्मों के संस्कारों के कारण तथा वात, पित्त और कफ […]
भोग
संसार में जितनी वस्तुएँ उत्पन्न होती हैं सभी उत्पन्न हुए जीवों के भोग के लिए ही हैं। अपने पूर्वजन्म के कर्मों के प्रभाव से जीव संसार में उत्पन्न होता है। उसी प्रकार भोग के अनुकूल उसके शरीर, योनि, कुल, देश, आदि सभी होते हैं। जब वह विशेष भोग समाप्त हो जाता है, तब उसकी मृत्यु […]
गंध
गीताकार भगवान श्रीकृष्ण ने कहा :‘पुण्योगंधः पृथिव्यां च…।‘पृथ्वी में पुण्यशाली गंध मैं हूँ ।सुगंध नहीं कहा ।सुगंध तो परफ्यूम में हो सकती है ।पृथ्वी में पुण्यशाली गंध है ।जिस गंध से मन प्रसन्न हो और सात्त्विकता की तरफ जाय वह पुण्यशाली गंध है और भगवान कहते है कि ‘वह मैं हूँ ।परफ्यूम की सुगंध पुण्यशाली […]
गायत्री मंत्र
जब भी कोई व्यक्ति गायत्री मंत्र का पाठ करता है तो अनेक प्रकार की संवेदनाएं इस मंत्र से होती हुई व्यक्ति के मस्तिष्क को प्रभावित करती हैं।जर्मन वैज्ञानिक कहते हैं कि जब भी कोई व्यक्ति अपने मुंह से कुछ बोलता है तो उसके बोलने में आवाज का जो स्पंदन और कंपन होता है, वह 175 […]
दर्शन और विज्ञान
आज जब व्यक्तिगत स्तर, आर्थिक स्तर और सामाजिक यानी संस्थागत तीनो स्तर पर विषमता फैल रही है तो इस विषमता को सम में आप्त (समाप्त) करने का एक मात्र उपाय यानी प्रथम और अन्तिम उपाय है (दर्शन और विज्ञान) (सेन्स और साईन्स) (धर्म और विज्ञान) (ज्ञान और विज्ञान) (सांख्य और योग) (सिद्धान्त और कर्म) (थ्योरी […]