गीताकार भगवान श्रीकृष्ण ने कहा :
‘पुण्योगंधः पृथिव्यां च…।
‘पृथ्वी में पुण्यशाली गंध मैं हूँ ।
सुगंध नहीं कहा ।
सुगंध तो परफ्यूम में हो सकती है ।
पृथ्वी में पुण्यशाली गंध है ।
जिस गंध से मन प्रसन्न हो और सात्त्विकता की तरफ जाय वह पुण्यशाली गंध है और भगवान कहते है कि ‘वह मैं हूँ ।
परफ्यूम की सुगंध पुण्यशाली गंध नहीं है ।
क्योंकि वह जीवनशक्ति का ह्रास करती है ।
वह दुःखदायी गंध है ।
जितने भी परफ्यूम है, जीवनशक्ति को क्षीण करनेवाले हैं, विकास करनेवाले नहीं ।
आज बस इतना ही…..